History of Haryana in Hindi Haryana gk (हरियाणा का इतिहास) Group Exam

History of Haryana in Hindi Haryana gk (हरियाणा का इतिहास) Group Exam

हरियाणा का इतिहास




हरियाणा राज्य का भारतवर्ष में महत्त्वपूर्ण स्थान है। भारत में ही नहीं वरन् संसार के मुख्य राष्ट्रों में भी अपनी विशिष्ट सभ्यता व संस्कृति के चलते हरियाणा ने खास पहचान कायम की है। गृह राज्य हमारे देश भारत का ऐसा हिस्सा है जिसे महान ऋषि-मुनियों ने दृषद्वती, आपगा व सरस्वती जैसी पाप-विनाशिनी नदियों के तट पर यज्ञाग्नि प्रज्वलित कर पवित्र व अनमोल बनाया है। हरियाणा राज्य का स्थान भारत में अद्वितीय है चाहे वह किसी भी क्षेत्र की बात हो।

हरियाणा का गठन


स्वतंत्रता के समय हरियाणा पंजाब में शामिल था 18 सितंबर, 1966 को लोकसभा द्वारा 'पंजाब पुनर्गठन विधेयक पारित किया गया। नवंबर, 1966 को देश के सत्रहवें राज्य हरियाणा का गठन किया गया। गठन के समय हरियाणा में सात जिले थे।

हरियाणा का नामकरण


हरियाणा शब्द मूलतः एक बौद्धिक शब्द 'हरयाणा' से बना है जिसका अर्थ है 'हरि' (हिंदू देव विष्णु) आयन (घर) अर्थात् परमेश्वर का निवास स्थल।

हरियाणा को विद्वानों द्वारा हरियाणा को दिए गए नाम

  • महाराज कृष्ण - हरना (लूटपाट)
  • राहुल सांकृत्यायन - हरिधानक्या
  • डॉ. बुद्धि प्रकाश - अभिरयाणा
  • डॉ. एच. आर. गुप्ता - आर्यन (आर्यों का घर)
  • जी. सी. अवस्थी - ऋग्वेद से उत्पन्न
  • यदुनाथ सरकार -  - हरियाला 
  • (ऋग्वेद में उल्लिखित नाम - रज हरयाणे
  • बाणभट्ट रचित 'हर्ष चरित' में - श्रीकंठ जनपत
  • पुष्पदंत रचित महापुराण में - हरियाणा

हरियाणा के प्राचीन अवशेषों के प्राप्ति स्थल 


  • मौर्यकालीन स्तूप और अन्य अवशेष हिसार व फतेहाबाद में। 
  • हड़प्पा कालीन सभ्यता से पूर्व की सभ्यता के आभूषण और अन्य अवशेष कुनाल (हिसार)
  • हड़प्पा कालीन सभ्यता के अवशेष भिवानी में।
  • कुषाण कालीन सोने व ताँबे के सिक्के मिताथल (भिवानी क्षेत्र) में।
  • शुंगकालीन फलक सुंध में।
  • हर्षकालीन तान मुद्रा सोनीपत में।
  • यौधेय गणराज्य की मोहरें नौरंगाबाद (भिवानी) में। 
  • जैन मूर्तियाँ हाँसी व रानीला में।
  • यौधेय काल साँचे खोखराकोट (रोहतक) में।
  • कुषाण शैली का धार स्तभ रोहतक में।
  • यक्ष की  मूर्तियाँ पलवल में।
  • सिक्के ढालने के साँचे खोखराकोट (रोहतक) औरंगाबाद में।
  • रामायण श्लोककित फलक नचारखेड़ा (भिवानी) में। पेहोवा में।
  • मिट्टी की मुहरें धौलपुर में।
  • अप्रेय जनपद के सिक्के अग्रोहा में। 
  • गुर्जर - प्रतिहारकालीन अभिलेख पेहोवा में। 
  • बलराम की मूर्ति अस्थल बोहर (रोहतक) में। 
  • इंडो ग्रीक शासकों के सिक्के खोखराकोट (रोहतक) में।
  • गुप्तकालीन मुद्राएँ रोहतक में। 
  • मुगल कालीन अवशेष हिसार, फतेहाबाद, रिवाड़ी, झज्जर आदि में।

मूर्तियाँ हरियाणा में धार्मिक सम्प्रदायों तथा धर्मेतर विषयों पर बनी मूर्तियाँ मिली हैं। ये मूर्तियाँ मिट्टी को पकाकर बनाई गई हैं। इन मूर्तियों में कुछ शुगकालीन हैं तथा कुछ कुषाणकालीन। कुषाण काल में बनी मूर्तियों का मुख्य केन्द्र रोहतक है। इसके बाद की मूर्तियाँ जैन और बौद्ध धर्म से संबंधित है।

मध्यकाल से संबद्ध मूतियाँ भी हरियाणा में पाई गई हैं। इनमें अधिकतर प्रतिहार तथा तोमरयूगीन है। इन मूर्तियों से तत्कालीन धार्मिक जनभावना का संकेत मिलता है। कला की दृष्टि से भी जनरुचि अभिव्यक्त होती है। हंसी और रानीला में कुछ समय पहले जैन मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं। कुरुक्षेत्र में हर्षवर्धन के भवनों और दुर्गा के टीले पड़े हैं। धानेसर से छह किलोमीटर दूर कर्म का किला है। हाँसी का किला खंडहर के रूप में है। प्राचीन मंदिरों के खंडहर भी मिलते है। ये मंदिर आठवीं से बारहवीं शताब्दी के मध्य बनाए गए थे। रोहतक, पिंजौर, कलायत आदि स्थानों पर पुराने मंदिर थे।

मौर्यकालीन स्तूप, लाट आदि के अवशेष चनेटी, तोपरा, हिसार, फतेहाबाद आदि में मिले हैं। इन अवशेषों से इस क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं कला-संबंधी प्रगति का परिचय होता है।




महत्त्वपूर्ण पुरातात्त्विक स्थल


  • रोहतक:- रोहतक, बहादुरगढ़ सांधी, बलियाना, काहनौर, कंसाला, खोखराकोट (रोहतक)। 
  • अंबालाः- संगता, लखनौर, जटखेड़ी, बीसापुर कलां, खेड़ी. मोहनपुर, दोल. रामशरण, माजरा, राणा, मुरथल, मिर्जापुर, रसा बेदी, भतार, बोधा, मेहता, खेड़ी, लूखी, हमीदपुर नारायणगढ़, सदौरा, पौडवाल, बरेली, कोड़ासन।
  • कुरुक्षेत्र:- राजाखेड़ा, धौलपुर, रसूलपुर, अमीन, मुगल, खेड़ी, बनहेड़ा, कर्ण किला, करियाला, सरसा बोहरा, स्तौर, अस्थिपुर, जारसी खुर्द, अरनाई, मीरचली, चिमारहेड़ी।
  • करनाल:- डांसर, पूजा, निसंग, सांभी, बहोला, मौड़ी, करनाल, कुंजपुरा, बस्तली। 
  • जींद :- इटाला, कलायत, संगतपुर, बेरीखेड़ी, जींद, मलारखेड़ी, नरवाना, खोखरी, जीवनखेडों, मनोहरपुर, बरसाना।
  • सोनीपत:- गुमद, फरमाना, गोहाना, अकबरपुर, सेमन, बरोश, रुखी। 
  • भिवानी:- तिगड़ाना, दादरी, मीताशल, फिशर, चांग मिश्री, मानह।
  • पानीपत:- उद्दलाना, कला, शिवपुरी, गगसीना, गंगामा, कछवा. निदाना, खेड़ी मानसिंह, बड़ी मैनी,रंबा, दामाद, झझरी, पानीपत। 
  • महेंद्रगढ़:- कन्नौज, नारनौल डांस
  • हिसार:- सीसवाल, फतेहाबाद, सलीमगढ़, मातेरशियम, हाँसी, सिंहवा, शाहपुर, शाहपुर गढ़ी, पाटन, राखी, गतिरोध, पाली, अलीपुर तरह, डाटा, सिसाय। 
  • सिरसा:- बनी, हुमायूं खेड़ा, राणिया, नकोरा, गढ़वाली।
  • गुड़गांव:- गुडगाँ, मंडला, पापदा, मोहन खेड़ी, अधा, खेडा माजरा, भादास, बस्सी, सुल्तानपुर,मलाब, अलटूका, गांगुली, कुरथला। 
  • रेवाड़ी:- रेवाड़ी, गुर्दा, बदसा, बादली, लोहाट।
  • फरीदाबाद:- पलवल, बल्लभगढ़, बमणी खेड़ा, छाईसा, अहरवा, लोहिया खेटा बलाई, सीही, बला. तिलपत
  • कैथल:- थेह, रंगोली, मोहाना, जठेड़ी, उकलाना, पंढरी।
  • यमुनानगरः- बस्ती, संध्या, दामला, सुहा, दीला। फतेहाबाद हिरके, चिम्मू, कौलगढ़, बुर्ज, बवानीखेड़ा, बनावली:- रत्ता टिब्बा, तलवाड़ा, टोहाना।
  • मेवात:- फिरोजपुर झिरका।


महत्त्वपूर्ण तथ्य


  • पंजाब प्रांत में 1 अक्टूबर, 1949 को सच्चर फार्मूला लागू किया गया।
  • फजल अली आयोग द्वारा 1956 ई. में सौंपे गए प्रतिवेदन में तत्कालीन पंजाब प्रदेश का भापायी आधार पर विभाजन नहीं किया गया।
  • अप्रैल, 1956 में क्षेत्रीय फार्मूला द्वारा केन्द्र सरकार ने पंजाय प्रांत को पंजाब एवं हरियाणा दो क्षेत्रों में विभाजित कर दिया तथा 24 जुलाई, 1956 को इस क्षेत्रीय फार्मूला को लागू कर दिया गया।
  • सन् 1957 में पंजाब में हिंदी क्रान्ति हुई। 
  • 23 अप्रैल, 1966 को जे. सी. शाह की अध्यक्षता में 'सीमा आयोग' का गठन किया गया।

हरियाणा राज्य का इतिहास 


हरियाणा के इतिहास को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से जाना जा सकता है। 

1.आदिकाल


राज्य में लगभग 1.5 करोड़ वर्ष पूर्व के मानव-जीवन के साक्ष्य मिले हैं। चंडीगढ़ पिजौर से प्राप्त एक खोपड़ी के गहन अध्ययन का निष्कर्ष प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. गाई पिलग्रिम ने निकाला है कि 1.5 करोड़ वर्ष पूर्व यहाँ आदि मानव का आवास था।

2.पुरापाषाणकाल



पुरापाषाण काल के अवशेष इस राज्य के अरावली क्षेत्र के अनंगपुर पहाड़ी, मेवला, पहाड़ी, अंकिर पहाड़ी, भाँखड़ी, नोदा कोह, गोठड़ा, पहाड़ी गाँव, भौजी, पाली, छतरपुर, खोरल, निमौर, धूलावल, मानसेर, सरसोला, पंचगाँव, कोटा पहाड़ी, सोहना का गढ़, शिवालिक क्षेत्र के सूरजपुर, डेराखरोना, भामला, मंशा देवी पिंजौर सुकेत्री पुपलाना आदि स्थानों से प्राप्त हुए हैं।


3.आद्य ऐतिहासिक युग



नवपाषाण युग के उपरांत इस क्षेत्र में आद्यैतिहासिक संस्कृति विकसित हुई. जिसके अवशेष सीसवाल (हिसार) से 1968 ई. में प्राप्त हुए। जिला हिसार से 26 किमी. दूर पश्चिम में चौतम नहर पर बसे हुए सीवालय गाँव में ुदाई पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ सूरजभान के नेतृत्व में कराई गई। चूंकि यहाँ सर्वाधिक प्राचीन संस्कृति के अवशेष मिले हैं, इसलिए इस संस्कृति को सीसवाल संस्कृति के नाम से पुकारा जाता है।

4.सिंधु घाटी सभ्यता

  • सिंधु घाटी सभ्यता के इस राज्य में पाए गए क्षेत्रों में बनावली सर्वप्रमुख है। यह क्षेत्र हरियाणा के हिसार जिले में प्राचीन सरस्वती की घाटी में विद्यमान है। 
  • वर्ष 1973-74 में आर. एस. बिष्ट ने इसकी खोज की थी। 
  • यहाँ से मिट्टी का खिलौना हल व सड़कों पर बैलगाड़ी के पहियों के निशान मिले हैं।
  • यहाँ से काफी मात्रा में जौ के प्रमाण मिले हैं। 
  • यह एकमात्र स्थल है, जहाँ से मातृदेवी की दो मृण मूर्तियाँ मिली हैं।
  • यहाँ से अग्निवेदियों के प्रमाण भी मिले हैं। 

5.वैदिक काल से पूर्व


मनु के चार पुत्र इक्ष्वाकु, परशु, सुद्युम्न व शर्याति थे। इनमें से सुद्युम्न का कार्य क्षेत्र सरस्वती के ऊपर का क्षेत्र (जिनमें अंबाला-कुरुक्षेत्र आदि सम्मिलित थे) था और शांति के कार्यक्षे्र की सीमा का विस्तार राजस्थान तक था।

ययाति ने अपने चार बड़े पुत्रों की अयोग्यता व अक्षमता को देखते हुए सबसे छोटे पुत्र पुरु को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जिसने पुरु वंश की स्थापना की।

  • पुरु वंश में आगे चलकर राजा दुष्यंत हुए और उनका उत्तराधिकारी भरत को बनाया गया। जो बाद में चक्रवर्ती सम्राट बना, जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। 
  • भरत के ही उत्तराधिकारी वंशज दिवोदास और सुदास का शासन इसी राज्य में था। 
  • दुर्भाग्य से उत्तराधिकारियों में सत्ता प्राप्ति के लिए आपसी संघर्ष के चलते सुदास के घोर प्रतिद्वंद्वी पुरुकुल्स के पुत्र त्रसदस्यु ने हरियाणा राज्य पर हमला कर अपने अधीन कर लिया। 
  • महाभारत के अनुसार कालांतर में गंगा घाटी के पांचालों ने रान्य के पुरु राजा संवरण पर हमला कर दिया। संवरण को राज्य छोड़कर जाना पड़ा। तत्पश्चात् पुरु राजा ने हिंदी-ईरानी सीमावतीप्रदेश में प्रबल हो रहे कुरुओं की सहायता से राज्य को पुनः प्राप्त किंगा इसके बाद हरियाणा पर गुरुओं का शासन स्थापित हो गया। 

उत्तर वैदिक काल


उत्तर वैदिक काल में इस राज्य में कुरु शासन व्यवस्था थी।

  • गाभारा ने कुरु सम्राट शान्तनु के शासन के समय राज्य पर आक्रमण किया। शान्तनु के पुत्र चित्रांग ने उन्हें सरस्वती नदी तट पर रोका। इसमें चित्रांग को प्राण त्यागने पड़े। अंत में कुरुओं ने विजय हासिल की। यह कुरुक्षेत्र का प्रथम युद्ध भा।

मौर्य काल


छठी शताब्दी ई.पू. इस राज्य में कई जनपदों की स्थापना हुई, इनमें एक कुरु गणराज्य था। महाभारत में मतमयूरक लोगों का उल्लेख है। सम्भवतः मौर्य सेना के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य को हरियाणा में स्थित मौर्य जनपद का शासक माना जाता है। 

  • राज्य के मौर्य साम्राज्य में सम्मिलित होने का उदाहरण टोपरा (अंबाला) में पाया गया स्तंभ-लेख तथा अशोक ने मानेसर में एक स्तूप भी बनवाया जिसमें महात्मा बुद्ध के अवशेष भी रखे गए थे।
  • यौधेय गण का आविर्भाव मौर्य वंश के बाद हुआ। युधिष्ठिर के पुत्र यौधेय ने यौधेयगण बनाया था। महाभारत के द्रोण पर्व में इसका उल्लेख है। 
  • राज्य के शक्तिशाली यौधेय का उल्लेख पाणिनी ने आयुधजीवी के रूप में किया है इस उल्लेख में महर्षि पाणिनी के महाभाष्य व्याकरण ग्रंथ में इसकी विवेचना की गई है।
  • जूनागढ़ के शिलालेख (150 ई.) में यौधेय गण का उल्लेख है। 
  • यौधेय गण के प्राचीन सिक्के 1834 ई. में कैप्टन कोटले को सहारपुर के निकट बेहट गाँव से तथा कनिंघम को सोनीपत से प्राप्त हुए। हाँसी, खरखौदा सिरसा, हिसार, रोहतक, सोनीपत, गुड्गाँव करनाल से इसी तरह के सिक्के प्राप्त हुए हैं। 
  • यौधेयों की राजधानी प्रकृतानाक (नौरंगाबाद-धामला) में थी। यौधेयों को कुषाणों से लड़ाई करनी पड़ी थी तथा कनिष्क ने इन पर सफलता प्राप्त की थी।
  • भिवानी जिले के औरंगाबाद से मिले सिक्कों पर ध्यान बहुधान्य अंकित है तथा इसकी लिपि ब्राह्मी है। 
  • विजयगढ़ के साक्ष्यों से पता चलता है कि महाराज की महासेनानायक होता था। इनके कुछ सिक्कों पर ब्राह्मण देव अंकित है। यह शब्द कार्तिकेय का द्योतक है जो कि गौधेग राष्ट्र का आराध्य देव थे।
  • बरवाला व अग्रोहा (हिसार) से प्राप्त प्रमाण बताते हैं कि हिसार में अग्र नामक गणराज्य था। इसका उल्लेख अष्टाध्यायी, बौधायन के स्रोत-सूत्र व पतंजलि के महाभाष्य में भी है। 
  • कुणिंद गण का प्रसार अंबाला जिले में था। यौधेय एवं अग्र गणराज्यों की तरह यहाँ भी व्यवस्था गणतंत्रात्मक थी। कुछ मुद्राओं से ज्ञात होता है कि कुणिंदों ने यौधेयों के साथ मिलकर कुषाणों को भारत से बाहर धकेल दिया था।
  • आर्जुनायन गण राजस्थान के कुछ भाग और हरियाणा के महेंद्रगढ़ क्षेत्र में फैला था। डॉ. अल्तेकर के अनुसार जिन मुद्राओं पर 'शि' शब्द अकित है यह यीधेगों और आर्जुनायनों के विलय का द्योतक है।

गुप्त काल


प्रयाग प्रशस्ति से ज्ञात होता है कि गुप्त शासक समुद्रगुप्त ने इस गणरान्य को गुप्त सामान्य मामिला लिया था। छठी शताब्दी में मानेसर में पुष्यभूमि नामक सेनापति ने स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी, जो कालांतर में वर्धन साम्राज्य के नाम से जाना गया। 

  • वर्धन साम्राज्य का सर्वप्रतापी शासक हर्षवर्धन चा, जिसने अतिम रूप से हूणों व गोढ़ शासक शशांक को हराया था। 
  • हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात् राज्य (हरियाणा) में यदु व कुरु शक्तियों ने जन्म में कुरु तथा दक्षिण-पश्चिमी राज्य में गुरुओं का शासन था।
  • प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय (805-833 ई.) के समय यह राज्य उसके अधीन था। मिहिरभोज (836-885 ई.) में इस समय पेहोवा उत्तर भारत का बढ़ा व्यापारिक कंद्र चा। यहां घोड़ों का व्यापार होता था
  • महेन्द्रपाल प्रथम के पेहोवा शिलालेख से प्रदर्शित होता है कि तोमरों में जाउल नामक पहला राजा था, उसी वंश में जन्जुक नामक वीर था। उसके दो पुत्र पूर्णराज व देवराज थे। 
  • 1631 ई. के एक शिलालेख में तोमर राजपूतों को 'सोमवंशी' क्षत्रिय और पांडवों का वंशज कहा गया है।
  • हर्षनाथ द्वारा स्थापित एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि शाकम्भरी चौहान शासक चंदन ने तोमर शासक पीपलराज को हराकर कर की स्थिति प्राप्त कर ली थी। 
  • महाकाल के द्रोण पर्व से राज्य के औधय गणराज्य का उल्लेख मिला है।
  • हिसार जिले के अग्रोहा एवं बरवाला से प्राप्त सिक्कों से हरियाणा के अग्र गणराज्य के संबंध में जानकारी मिलती है।
  • कुणिंद गणराज्य का क्षेत्र वर्तमान अंबाला जिले तक विस्तृत था। 
  • राज्य के वर्तमान महेंद्रगढ़ जिले में अर्जुनायन गणराज्य विस्तृत था। 
  • जैन साहित्य 'भद्रबाहु चरित' एवं 'कथाकोश' से हरियाणा के पहली से तीसरी शताब्दी तक के सांस्कृतिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। 
  • बौद्ध ग्रंथ 'दिव्यावदान' एवं 'मज्झिम निकाय' में हरियाणा के तत्कालीन जनजीवन का उल्लेख प्राप्त होता है।
  • 1009 ई. में महमूद गजनवी ने थानेसर पर आक्रमण किया। उस समय वहाँ का शासक जयपाल था। महमूद बिना लड़े ही वापस चला गया। 
  • 1014 ई. में गजनवी ने थानेसर पर पुनः आक्रमण किया जिसमें जयपाल को हार का सामना करना पड़ा
  • महमूद गजनवी के बाद 1037 ई. में उसके पुत्र मसूद ने हाँसी पर आक्रमण किया और तोमर शासक कुमारपाल देव से उसका संघर्ष हुआ, जिसमें मसूद को विजय हासिल हुई। इसके साथ ही उसका थानेसर कुरुक्षेत्र सहित सारे राज्य (हरियाणा) पर कब्जा हो गया।
  • 1043 ई. में मसूद के बेटे मादूद ने आक्रमण किया। तोमर शासक कुमारपाल देव ने अन्य की मदद से दूध को हराकर भगा दिया।
  • 1051-81 ई. के मध्य यहाँ का शासक परम प्रतापी अनंगपाल द्वितीय था।
  • 1981 ई. के बाद गजनी के शासक इब्राहिम ने हमला किया ओर तोमर सम्राट तेजपाल ने बिना लड़े हार स्वीकार कर ली।
  • 1151 ई. में विग्रहराज चतुर्थ ने हाँसी य दिल्ली पर अधिकार कर लिया। पृथ्वीराज तृतीय ने तोमरों का अन्त कर दिया।
  • 1191 ई. तराइन के युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गोरी को भूल चटा दी, किन्तु द्वितीय युद्ध में यह मुहम्मद गोरी से पराजित हो गया था। 
  • 1248 ई. में नासिरुद्दीन सुल्तान ने सेनापति बलबन को मेवात भेजा किन्तु वह विद्रोह दवाने में नाकाम रहा। पुनः 1260 ई. में उसे सफलता मिली
  • 1263 ई, में बलवन दिल्ली का सुल्तान बन गया तथा गोपालगिरी में एक दुर्ग का निर्माण कराया।
  • 1398 ई. में समरकन्द के शासक तैमूर ने भारत पर हमला किया तथा तैमूर के लौटते ही(हरियाणा) के सभी शासक दिल्ली सल्तनत से स्वतंत्र हो गए। 
  • 1525 ई. में बाबर के हमले के समय हसन खान मेवाती ने बाबर से लड़ाई लड़ी। बाबर ने राज्य (हरियाणा) को चार प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित कर दिया।
  • 1540 ई. में शेरशाह सूरी ने यह राज्य हुमायूँ से छीन लिया था क्योंकि उसका जन्म नारनौल में हुआ था
  • 1555 ई. में हुमायूँ ने इस प्रदेश पर दोबारा सत्ता हासिल की। 
  • 1556 ई. में हुमायूँ के पश्चात् अकबर गद्दी पर बैठा। उसका युद्ध हेमू के साथ 1556 ई. में पानीपत में हुआ था, जिसमें अकबर ने सफलता हासिल की।
  • औरंगजेब विरुद्ध नारनौल में 1672 ई. में सतनामियों का भयंकर विद्रोह हुआ।
  • सतनामी रैदास द्वारा चलाए गए रैदासी संगठन की शाखा के थे इसे मुगलों ने सफलतापूर्वक दवा दिया
  • बन्दा बैरागी ने गुरु गोविंद सिंह से नांदेड नामक स्थान पर मुलाकात कर मुगलों के विरुद्ध संघर्ष के लिए सोनीपत के लिए सिहरी खांडा को अपना मुख्यालय बनाया उसने सोनीपत, कैथल, थानेसर, शाहबाद, कुंजपुरा, सरहिंद पर विजय प्राप्त की।
  • 1710 ई. में बहादुरशाह ने करनाल व तरावड़ी के बीच तीन बार बंदा बैरागी को पराजित किया।
  • 1754 ई. में मराठों ने हिसार, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी, रोहतक आदि क्षेत्रों को अपने अधीन कर लिया था। 
  • 1754 ई. में अब्दाली व मराठों के बीच फरीदाबाद में युद्ध हुआ था, जिसमें मराठों को पराजय का सामना करना पड़ा।

स्मरणीय प्रमुख तथ्य


  • 1081 ई. के बाद गजनी शासक इब्राहिम के हमले के समय तोमर सम्राट तेजपाल ने बिना लड़े ही हार स्वीकार कर ली थी।
  • गोपाल गिरि में दुर्ग का निर्माण बलवन द्वारा कराया गया। 
  • तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ई. में पृथ्वीराज चौहान एवं मुहम्मद गोरी के बीच हुआ जिसमें मुहम्मद गोरी की हार हुई।
  • 1257 ई. में मेवातियों द्वारा हाँसी में बलबन के काफिले पर आक्रमण किया गया। 
  • 1260 ई. में बलबन ने मेवातियों को हराया। 
  • फिरोज तुगलक ने हिसार, फतेहाबाद एवं फिरोजाबाद नामक नगरों को स्थापित किया।
  • पानीपत के तृतीय युद्ध के उपरांत सूरजमल ने मेवात, झज्जर व रोहतक पर अधिकार कर लिया था
  • सतनामी विद्रोह 1672 ई. का दमन मुगलों ने किया था।
  • 25 दिसंबर, 1764 में नजीबुद्दौला के साथ सूरजमल का संघर्ष हुआ, जिसमें सूरजमल की हत्या कर दी गई थी।
  • 1765 ई. में नजीबुद्दौला ने सोनीपत पर हमला कर भिवानी, मेवात, फर्रुखनगर व हिसार पर अधिकार कर लिया। हिसार में उसने अपने पुत्र जावित खाँ को उत्तराधिकारी बनाया। 31 अक्टूबर, 1770 में हिसार में उसकी मृत्यु हो गई।
  • 1772 ई. में शाह आलम मराठों के संरक्षण में दिल्ली पहुंचा। वहाँ उसका विरोध मिर्जा नजफाँ ने किया। उसने जाटों से रेवाड़ी, झज्जर और गुड़गांव, राजपूतों से कानोड व नारनौल, बिलोचों से सोनीपत, रोहतक, भिवानी, भट्टियों से हिसार व सिरसा तथा सिखों से करनाल व अंबाला क्षेत्रअपने अधिकार में ले लिए। 
  • 1782 ई. में मिर्जा नजफ खां की मृत्यु के उपरांत मराठा सरदार महादजी सिधिया ने दिल्ली पर अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा पर लिया। उसने सिखों से पहले संघर्ष फिर संधि की। उसने (सिंधिया) इस्माइल वेग के मार्गदर्शन में गुड़गाँव, नारनौल, कानोड आदि क्षेत्रों में सेना भेजकर संघर्ष किया और सफलता प्राप्त की व हरियाणा के चार जिलों देहली, पानीपत, हिसार व मेवात जिलों में मिला दिया।
  • 1782 ई. में आयरलैंड निवासी जॉर्ज टॉमस भारत आया व उसने 1798 ई में जींद पर अधिकार करने के उपरांत करनाल, पटियाला, गुड़गाँव, रोहतक, हिसार, पानीपत, भिवानी के कुछ क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। उसने हाँसी को राजधानी बनाया, किंतु 1802 ई. में उसकी मृत्यु के समय से सिखों ने खदेड़ दिया था।
  • दौलतराव सिंधिया ने 30 दिसंबर, 1803 में हरियाणा को सब्जी अंजन गाँव की संधि के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया।
  • राज्य के तत्कालीन चर्चित विद्रोहों में सन् 1809 ई. का छछरौली का विद्रोह सन् 1818 ई. में राणिया का विद्रोह और सन् 1824 ई. का किसानों का विद्रोह खूब चर्चित रहे।
  • 1833-34 ई. में इस राज्य को उत्तर-पश्चिमी प्रांत का अंग बना दिया गया जिसका केंद्र आगरा को बनाया गया।



History of Haryana in Hindi Haryana gkवस्तुनिष्ठ प्रश्न





1. प्राचीनकाल में हरियाणा राज्य अन्य किस नाम से जाना जाता था?
(a) ब्रह्मावर्त प्रदेश (b) ब्रह्मर्षि प्रदेश (c) ब्रह्मा की उत्तरदेवी (d) सभी से




2. किसी भरतवंशी शासक ने हरियाणा प्रदेश से अपना विजय अभियान शुरू किया था?
(b) अर्जुन (a) सुदास (c) भरत(d) भीष्म




3. महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध प्रदेश में किस स्थान पर लड़ा गया था?

(a) पानीपत (b) कुरुक्षेत्र (c) झज्जर (d) बल्लभगढ़




4. मुगन-काल में इस प्रदेश में जनपदों का स्थान किसने लिया था? 

(a) गण संघ ने (b) गण-व्यवस्था ने (c) खापों ने (d) पंचायत ने




5. बौद्ध काल के किन महाजनपदों में आधुनिक हरियाणा के भाग शामिल थे? 
   (a) कुरु और पांचाल (b) कौशल और वज्जि (0) सूरसेन और अवंती (d) अस्सक और




6 अंबाला से प्राप्त अभिलेख (टोपरा) किस शासक के समय का है? 
 (a) निम की पिक्स (b) कनिष्क (c) अशोक (d) सिकंदर लोदी




7. तोमर शासकों के शासनकाल में हरियाणा में व्यापार, कला व संस्कृति की उन्नति की जानकारी किस ग्रंथ से मिलती है?

(a) तहकीक-ए-हिंद  (b) हर्षचरित  (c) कादंबरी (d) यशस्तिलक चम्पू



8. 1526-27 में बाबर के आक्रमण के समय तावडू के परगने का शासक कौन था?
(a) हसन खाँ (b) मोहन सिंह मंढार (0) फैजल खाँ (d) जलाल खाँ




9. बाबर कालीन राजपूत शासक मोहन सिंह मंढार की रियासत हरियाणा में कहाँ पर थी? 
(a) कैथल के परगने मंदार में  (b) तावडू (c) जींद (d) पानीपत




10.1756-57 में हरियाणा निम्नलिखित में से किसके अधिकार क्षेत्र में रहा? 
(a) मुगलों के (b) सिक्खों के (c) मराठों के (d)सतनामियों के 


11. अहमदशाह अब्दाली ने अपने देश लौटते समय हरियाणा का उत्तरी भाग (अंबाला, जींद, कुरुक्षेत्र,करनाल जिला) किसको सौंप दिया?
(a) मुगलों को (b) सिक्खों को (c) सरहिंद के गवर्नर जैन खाँ को (d) दुर्रानी के गवर्नर गेन खाँ को



12. मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच प्रदेश में कौन-सा प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया था?

(a) पानीपत का तृतीय युद्ध (b) पानीपत का द्वितीय युद्ध (c) पानीपत का प्रथम युद्ध (d) कोई नहीं



13. प्रदेश के किस स्थान को जॉर्ज थॉमस ने अपनी राजधानी बनाया था?
(a) बलिया (b) टोहाना (c) हाँसी का दुर्ग (d) बहरामपुर




14. 1802 ई. में जॉर्ज थॉमस की मृत्यु, प्रदेश में किस स्थान पर हुई थी?
(a) महेंद्रगढ़ (b) बहरामपुर (c) नारनौल (d) बावल




15. सन् 1809-10 में समस्त हरियाणा किसके अधिकार में था? 
(a) मराठों के (b) सतनामियों के (c) मुगलों के (4) अंग्रेजों के




16. आधुनिक हरियाणा राज्य का निर्माण कब किया गया था?
(a) 1 नवंबर, 1966 (b) 5 जनवरी, 1967 (c) 1 नवंबर, 1958 (0) 15 अगस्त, 1947 



17. औद्योगिक कानून-प्राक् हड़प्पा, हड़प्पा परवर्ती हड़प्पा आदि संस्कृतियों के प्रमाण हरियाणा में किस स्थान से प्राप्त हुए है? 

(a) वणावली (b) सोसवाल (c) मिर्जापुर (d) सभी से




18. महाभारत-काल से शताब्दियों पूर्व हुए आर्यवंशी कुरुओं ने इस प्रदेश में किस युग का प्रारंभ किया था?
(a) कृषि-युग (b) ताम्र-युग (c) लोह-युग (d) धातु-युग 


19. भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विश्व प्रसिद्ध गीता का उपदेश हरियाणा में किस स्थान पर दिया गया था?
(a) रेवाड़ी (b) पेहवा (c) कुरुक्षेत्र d) पानीपत



20. यौधेय-काल में हरियाणा प्रदेश को निम्नलिखित में से किस नाम की संज्ञा दी गई?
(a) यौधेय गणराज्य (b) बहुधान्यक-प्रदेश (0 मत्स्य प्रदेश गण-प्रदेश 


21. प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपनी पुस्तक में हरियाणा के किस नगर के वैभव और समृद्धि का वर्णन किया है?
(a) स्थाण्वीश्वर (थानेश्वर) (b) पानीपत (c) रोहतक (d) अंबाला




22 प्रदेश का कौन-सा स्थान, अग्रेयगण की राजधानी था? 
(a) रेवाड़ी (b) सिरसा (c) हाँसी (d) अग्रोहा




23. महमूद गजनवी ने थानेश्वर पर कब आक्रमण किया था? 
(a) 1013 ई. में (b) 1014 ई. में (c) 1016 ई. में (d) 1017 ई. में




24. प्रदेश का थानेश्वर नामक नगर किस प्रसिद्ध राजा की राजधानी था?
(a) हर्षवर्धन b) अशोक (c) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (d) कनिष्क 


25. बारहवीं शताब्दी में किस चौहान शासक ने हरियाणा प्रदेश पर आक्रमण कर तोमरों को पराजित किया था?
(a) विग्रहराज VI (b) विग्रहराज II (c) अर्णोराजा (d) पृथ्वीराज चौहान




26. गुलाम वंश के शासक बलबन ने हरियाणा के शक्तिशाली मेवों की शक्ति को नष्ट करने प्रयास कब किया था? (a) 1260 ई. में (b) 1265 ई. में C) 1266 ई. में ( 1267 ई. में



27. तुगलक शासक फिरोज तुगलक ने प्रदेश के हिसार जिले में कौन-सा नगर बसाया था? 
(a) टोहाना (b) हाँसी (c) सिवानी (d) फतेहाबाद




28. निम्नलिखित में से प्रदेश के किस नगर पर तैमूर ने आक्रमण किया था?
 (a) सिरसा (b) फतेहाबाद (c)हिसार (a) सभी पर




29. 1526 ई. में हरियाणा में किस स्थान पर बाबर और इब्राहीम लोदी के बीच प्रसिद्ध युद्ध हुआ था?
(a) पानीपत (b) कुरुक्षेत्र (c) रोहतक (d) जींद



30. प्रसिद्ध मुगल शासक अकबर के समय में रेवाड़ी का शासक कौन था? 
(a) तुलाराम (b) कर्णसिंह(c) हेमचन्द्र (हेमू) (d) फूलसिंह




31. अकबर और हेमचंद्र (हेमू) के बीच पानीपत का प्रसिद्ध द्वितीय युद्ध कब लड़ा गया था?

(a)1550 ई. में (b) 1552 ई. में (c) 1554 ई. में (d) 1556 ई. में



You may like these posts