आधुनिक हरियाणा एवं राष्ट्रीय आंदोलन Haryana Gk - Group Exam

आधुनिक हरियाणा एवं राष्ट्रीय आंदोलन Haryana Gk - Group Exam

आधुनिक हरियाणा एवं राष्ट्रीय आंदोलन




मुगलकाल के बाद और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रभुत्व के साथ ही संपूर्ण देश की तरह हरियाणा में भी आधुनिक काल का आरंभ होता है। हरियाणा में भी लोगों के मन में अन्य राज्यों के लोगों की तरह अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश की भावना पनप रही थी। यहाँ के लोगों ने 1803 ई. से लेकर 1806 ई. तक अंग्रेजों के प्रतिनिधियों का पुरजोर विरोध किया। लेकिन सुसंगठित सेना के सामने आखिर में उन्हें घुटने टेकने पड़े और 1809-10 ई. में पूरे हरियाण पर अंग्रेजों ने अपना अधिकार कर लिया।

अंग्रेजों ने हरियाणा को दो भागों में बाँटा-एक जिसमें सीधा कंपनी का शासन था। यह क्षेत्र दिल्ली के 60 किमी. उत्तर व 60 किमी. दक्षिण में फैला था। शेष हरियाणा इन्होंने अपने समर्थकों को दिया जिन्होंने 1803 ई. के आंग्ल-मराठा युद्ध में इनकी सहायता की। अंग्रेजों ने पूरे हरियाणा में अपनी व्यवस्था लागू की। 1858 ई. में इसे पंजाब प्रांत के साथ मिला दिया।

ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह


कंपनी ने अपनी शोषण नीति को हरियाणा में भी लागू किया। साथ ही, भू-राजस्व की 'महालवाड़ी व्यवस्था को भी यहाँ लागू किया। इस व्यवस्था के तहत ग्रामों या महलों पर नंबरदार नियुक्त किए गए। ये नंबरदार ज्यादा-से-ज्यादाय राजस्व वसूल कर कंपनी को देते थे। कंपनी की असंगठित प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक शोषण तथा लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ हस्तक्षेप के कारण लोगों में कंपनी के खिलाफ असंतोष की भावना जन्म लेने लगी। इस असंतोष के कारण ही राज्य की जनता ने 18181856 ई. के बीच करीब 10 बार अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया। इनमें छछरौली का विद्रोह (1818 ई.), रानियों का विद्रोह (1818 ई.), किसानों की क्रांति (1824 ई.) जींद के राजा प्रताप सिंह की बगावत व राजा संगीत सिंह का विद्रोह तथा बावली का विद्रोह (1835-36 ई.), अंग्रेज रेजीडेंट विलियम फ्रेजर की हत्या (1835 ई.). लाडवा नरेश अजीत सिंह का विद्रोह (1845 ई.) आदि प्रमुख विद्रोह थे।

ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ प्रमुख विद्रोह



1857 ई. में हुए भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के प्रभाव से हरियाण भी अछूता नहीं रहा 19 मई को अंबाला छावनी में भारतीय सैनिकों ने विद्रोह करने का असफल प्रयास किया। लेकिन रोहतक में हुई क्रांति ने शहर से अंग्रेजी शासन का खात्मा कर दिया। पानीपत और कुरुक्षेत्र के पास थानेसर में भी अंग्रेजी राज्य को लगभग समाप्त कर दिया गया। इस क्रांति के दौरान लगभग परा हरियाणा अंग्रेजों के विरुद्ध खड़ा था। सिर्फ अंबाला में ही अंग्रेजी हुकूमत ने पूर्व सतर्कता के कारण विद्रोह को शुरू होते ही दया दिया था। हालांकि शेष हरियाणा लंबे समय तक कंपनी के प्रभाव से मुक्त रहा।

विभिन्न उतार-चढ़ाव के बाद अन्त में 15 अगस्त, 1947 ई. को भारत अंग्रेजी हुकूमत के अधिकार से मुक्त हुआ। आजादी के बाद हरियाणा भारतीय पंजाब प्रांत का भाग बना रहा और 1966 ई. में एक अलग राज्य बना।

1857 ई. का संग्राम



  • मेरठ में 10 मई, 1857 को हुए सैनिक विद्रोह की चिंगारियाँ 13 मई, 1857 को हरियाणा में स्थित अंबाला छावनी पर पड़ी, जिसके परिणामस्वरूप 300 विद्रोही सैनिक गुड़गाँव की ओर चले. रास्ते में उनकी झड़प कलक्टर विलियम फोर्ड से हुई।



  • हरियाणा में 1857 ई की संग्राम में सम्मिलित प्रमुख व्यक्तियों में अहमद अली, बल्लभगढ़ के नाहर सिंह और पटौदी के अकबर अली थे तथा साथ ही दो अहीर भाई राव तुलाराम और गोपाल देव भी शामिल थे।



  • जयपुर राज्य के अंग्रेज रेजीडेट मेजर राम ने मेवातियों के विद्रोह को कुचलने का प्रयास किया किन्तु हरियाणा के सोहना व तावडू के संघर्ष में उसे हारकर भागना पड़ा।



  • रोहतक पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अंग्रेजों ने अंबाला से सेना 24 मई को हडसन के नेतृत्व में भेजी थी।



  • हिसार, हाँसी तथा सिरसा में स्थित लाइट इन्फैन्ट्री ने बगावत की थी।



  • अंग्रेजों ने हिसार पर कब्जा करने के लिए जनरल वार्न कोर्टलैंड के नेतृत्व में फिरोजपुर से सेना भेजी। 17 जून को ऊधा नामक गाँव में नवाब नूर मोहम्मद खाँ के साथ झड़प हुई। इस युद्ध में 530 क्रांतिकारी मारे गए। अंग्रेजों ने नवाब को पकड़कर फांसी दे दी।



  • 17 जुलाई को हिसार पहुंचने वाली सेना का नेतृत्व कोर्टलैंड ने किया था।


कांग्रेस व राष्ट्रीय आंदोलन



  • 1885 में अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस की स्थापना होने के बाद 1886 ई. में राय बहादुर मुरलीधर की कोशिशों से अंबाला में कांग्रेस की एक शाखा बनी।



  • अक्टूबर, 1886 में रोहतक में तुर्राबाज खाँ की अध्यक्षता में कांग्रेस की एक सार्वजनिक बैठक हुई।



  • लाला लाजपत राय ने 1887 ई. में हिसार व रोहतक में कांग्रेस का कार्य शुरू कराया।



  • लाला लाजपत राय, राय बहादुर मुरलीधर के अतिरिक्त दीनदयाल शर्मा, बालमुकुंद गुप्त, छबीलदास, शादीलाल, गौरीशंकर, दुलीचंद आदि राज्य निवासियों ने कांग्रेस के विभिन्न अधिवेशनों में हिस्सा लिया।



  • द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रारंभ होने से अचानक परिस्थितियाँ बदल गई क्योंकि पंजाब ने इंग्लैं का समर्थन किया।



  • हरियाणा में पं. नेकीराम शर्मा ने प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत में अंग्रेजों द्वारा सैन्य भर्ती अभियान पर आपत्ति उठाई।



  • सन् 1937 के चुनाव के बाद पंजाब प्रांत (हरियाणा उस समय पंजाब प्रांत का हिस्सा था) में सिकंदर हयात के नेतृत्व में यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनी।



  • लोहारू रियासत (हिसार जिला) के शासक अमीनुद्दीन के अत्याचारों के खिलाफ हिसार के नेकीराम शर्मा ने आंदोलन किया।



  • जींद रियासत में प्रजामंडल आंदोलन 1940 ई. में आरंभ हुआ. जिसका नेतृत्व हीरा सिंह चिनारिया ने किया।



  • यूनियनिस्ट मंत्रालय का नाम बदलकर मुस्लिम लीग रखने के मुद्दे पर सर छोटूराम व जिन्ना के मध्य सीधा संघर्ष हुआ।


सत्याग्रह आंदोलन



  • रौलेट एक्ट के विरोध में 30 मार्च, 1919 से 19 अप्रैल, 1919 के बीच सत्याग्रह आंदोलन



  • चलाया गया। प्रदेश के नेताओं के आमंत्रण पर इस आंदोलन को प्रेरित करने हेतु महात्मा गांधी मुम्बई से हरियाणा आए।



  • 10 अप्रैल, 1919 को जब गांधीजी पलवल पहुंचे तो सरकार ने उन्हें हिरासत में लेकर मुम्बई जाने वाली गाड़ी में बिठा दिया। इससे प्रदेश में उत्तेजना फैल गई।



  • 14 अप्रैल को रेल कर्मचारियों एवं जनता ने बहादुरगढ़ स्टेशन पर आक्रमण किया।



  • 19 अप्रैल को क्रांतिकारियों ने अंबाला छावनी में 1/34 सिख पाइनियर रेजीमेंट के स्टोर में आग लगा दी। इस प्रकार हर जगह तोड़-फोड़ होती रही।



  • उसी समय गांधीजी ने अहिंसा वादी तरीके से आंदोलन चलाने की योजना बनाई।


असहयोग आंदोलन



  • हरियाणा के पानीपत में अक्टूबर, 1920 में असहयोग आंदोलन संबंधी प्रथम सभा का आयोजन लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुआ।



  • अक्टूबर, 1920 में ही भिवानी में एक बड़ी सभा का आयोजन लाला मुरलीधर की अध्यक्षता में किया गया।



  • इस आंदोलन के चलते हरियाणा के बहुत से लोगों ने सरकार से प्राप्त पदकों व सम्मानों को लौटा दिया। अंबाला के लाला मुरलीधर ने 'रायबहादुर' सम्मान लौटा दिया।



  • वकीलों द्वारा सरकारी न्यायालयों का बहिष्कार किया गया व ग्राम पंचायतों की स्थापना की।


मार्ले-मिंटो सुधार पर प्रतिक्रिया (1909 ई.)



  • प्रदेश में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र अंबाला बना जहाँ दिसंबर, 1909 में वहाँ के उपायुक्त के बंगले पर बम फेंका गया।



  • प्रदेश के पत्रकार बालमुकुंद गुप्त ने शिवशम्भू का चिट्ठा नामक लेखों के माध्यम से खुला विरोध किया।



  • 1909 ई. के मार्ले-मिंटो सुधार के अधीन गुड़गाँव, रोहतक व हिसार के जिला बोर्ड व कमेटियों की वोट से पंजाब विधानसभा के लिए एक सदस्य चुने जाने की अनुमति दे दी गई।



  • अंबाला व करनाल जिलों को शिमला के साथ जोड़कर सदस्यता निश्चित की गई।


राज्य का प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध



  • राज्य प्रथम विश्वयुद्ध के समय मुख्य भर्ती क्षेत्रों में से एक था, इसलिए इसका विशिष्ट स्थान था।



  • पंजाब क्षेत्र से युद्ध के दौरान वीर सेना प्रदान करने के कारणा सरकार ने उपहारस्वरूप शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को नई विधान परिषद में दोनों क्षेत्रों की जनसंख्या के आधार पर पृथक् प्रतिनिधित्व प्रदान किया।



  • इसका विरोध रोहतक के राय बहादुर चौधरी लालचंद ने किया।



  • अंततः सरफज्ले हुसैन, लाला हरकिशन लाल व चौधरी लालचंद के मध्य राजनीति चलती रही।



  • स्वदेशी आंदोलन प्रचार-प्रसार के लिए पं. मदन मोहन मालवीय व मोहम्मद अली अक्टूबर, 1921में रोहतक आए।



  • गांधीजी ने रोहतक में राष्ट्रीय शिक्षा देने के लिए तथा विदेशी शिक्षा के बहिष्कार हेतु वैश्य उच्च विद्यालय की नींव रखी।


साइमन आयोग का विरोध



  • राज्य के भिवानी, रोहतक, झज्जर व अंबाला आदि में साइमन कमीशन का कडा विरोध किया गया।



  • पंजाब के लाहौर नगर में विरोध के फलम्वूप खाला जी को चोई तगी और बाद में उनका मृत्यु हो गई।



  • डॉ. सत्यपाल, श्रीराम शर्मा व नेकीराम शर्मा आदि ने लोगों को प्रोत्साहित किया।



  • 10 मार्च को रोहतक में किसान मजदूर सम्मेलन का आयोजन अर्जुन सेठी ने किया। इसमें जवाहर लाल नेहरू भी उपस्थित थे।



  • अक्टूबर, 1920 में राज्य में असहयोग आंदोलन संबंधी प्रथम सभा का आयोजन लाला राय की अध्यक्षता में पानीपत में हुआ।



  • भिवानी में सम्पन्न असहयोग सभा की अध्यक्षता लाला मुरलीधर द्वारा अक्टूबर 1920 गई।



  • फरवरी, 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी द्वारा रोहतक में राष्ट्रीय शिक्षा प्रदान करने हेतु तथा विदेशी शिक्षा के बहिष्कार के लिए वैश्व उच्च विद्यालय की नींव रखो गई


सविनय अवज्ञा क्रांति



  • 1930 में गांधीजी की दांडी यात्रा के बाद नमक कानून का विरोध करने पर प्रदेश निवासिया ने भी गांधीजी के समर्थन में प्रतीकात्मक, नमक बनाया



  • अंबाला में लाला दुलीचंद की पुत्रियों विद्यावती, यशोदा व जमना के नेतृत्व में कई महिलाओं ने इस आंदोलन में भाग लिया।



  • किसानों ने 'कर मत दो' क्रांति आरंभ की।


भारत छोड़ो आंदोलन



  • 8 अगस्त, 1942 में इस आंदोलन की घोषणा के साथ ही प्रदेश में रेलवे स्टेशनों, डाकघर, तारघर, पुलिस थानों पर तोड़फोड़ व प्रदर्शन किया गया।



  • बड़े नेताओं की गिरफ्तारी हो जाने से जनता ने स्वयं ही क्रांति संचालित की।


प्रथम स्वतंत्रता-संग्राम के प्रमुख योद्धा


मुख्य रूप से शेर नाहर सिंह का नाम प्रथम स्वतंत्रता- संग्राम के हरियाणवी योद्धाओं में लिया जाता है। ये 1829 ई. में बल्लभगढ़ रियासत के प्रशासक बने। ये अंग्रेजों के कट्टर विरोधी थे। दिल्ली सम्राट बहादुर शाह जफर से मित्रता की ओर अपने सैनिकों को भेजकर सम्राट को दिल्ली की गद्दी ब्रिटिश से मुक्त करवाकर पुनः पाने में सहायता की, लेकिन इसके 4 माह 7 दिन बाद ही 20 सितंबर, 1857 को अंग्रेजों ने दिल्ली को पुनः जीत लिया और 23 सितंबर, 1857 को अंग्रेज अधिकारी शाब्ज ने नाहर सिंह को घुड़साल में बंदी बना लिया। इन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर अंग्रेजों ने इन्हें 9 जनवरी, 1858 को चांदनी चौक पर बेरहमी से फाँसी पर लटका दिया था।

नवाब अब्दुर्रहमान खाँ ने 1857 ई. का क्रांति में अंग्रेजों के विरुद्ध बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अंग्रेजी सेना के खूब छक्के छुड़ाए। 8 सितंबर, 1857 को उन पर विद्रोही व बागी होने का आरोप लगाकर मुकदमा चलाया और 17 दिसंबर, 1857 को सुनियोजित ढंग से उन्हें दोषी करार देकर 23 दिसंबर, 1857 को लालकिले के सामने फांसी दे दी गई।

नवाब अहमद अली गुलाम खाँ: एक छोटी सी रियासत के मालिक नवाब अहमद अली गुलाम खाँ ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने खुलकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध का बिगुल बजाया। 20 सितंबर, 1857 को दिल्ली सम्राट को अपनी गद्दी पुनः प्राप्त करने में इन्होंने भी महती भूमिका निभाई। इससे खफा होकर अंग्रेजी सरकार ने एक टुकड़ी को नवाब के किले पर आक्रमण के लिए भेजा। सेना सहित वीरता से लड़ने वाले नवाब को अन्ततः नतमस्तक होना पड़ा। उन्हें 4 नवंबर, 1857 को दिल्ली लाया गया और 12 जनवरी, 1858 को ब्रिगेडियर शावर्ज के नेतृत्व में उन पर औपचारिक मुकदमा चलाकर राजद्रोही करार देकर अंग्रेजों ने उन्हें 22 जनवरी, 1858 को फांसी की सजा सुना दी और 23 जनवरी, 1858 को चांदनी चौक में कोतवाली के सामने मृत्युदंड दिया।

नूर समंद खाँ: राणिया (सिरसा) नवाब ने अंग्रेजी सरकार का हमेशा डटकर विरोध किया। 17 जून, 1857 को उन्होंने पास के गाँव औढ़ा में अंग्रेजी सेना का सामना किया, लेकिन अंत में उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी। उन्हें भी सुनियोचित ढंग से अंग्रेजों ने फाँसी पर लटका दिया। राव किशन गोपाल उस समय राव किशन गोपाल मेरठ में कोतवाल थे, लेकिन संग्राम के समय ये नागल पठानी आ गए। वे 13 नवंबर, 1857 को नसीबपुर (झज्जर) में क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजी सेना से लड़े और अपने बड़े भाई राव रामलाल के साथ रणभूमि में वीरगति प्राप्त की।

लाला हुकमचंद जैन व मिर्जा मुनीर बेगः ने सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया और ये निरंतर दिल्ली सम्राट के संपर्क में बने रहे। राजद्रोह का आरोप लगाकर इन्हें 14 जनवरी, 1858 को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई और 19 जनवरी, 1858 को इन्हीं के आँगन में फांसी पर लटका दिया।

बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह के साले मोहन सिंह ने अपने जीजा के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया था। अंत में इन्हें भी मृत्यु-दंड की सजा सुनाई गई।

नवाब बहादुर जंग खाँ: दादरी (बहादुरगढ़) रियासत के इस नवाब ने अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांतिकारियों का तन-मन-धन से साथ दिया। इन पर मुकदमा चलाया गया, लेकिन इन्हें दोषी सिद्ध न किया जा सकता। इनकी सम्पत्ति जब्त करके इन्हें लाहौर भेजने की सजा दी गई।

राव तुलाराम इस महायोद्धा ने अंग्रेजों से अपने पूर्वजों के इलाकों रेवाड़ी, बोहड़ा, शाहजहाँपुर आदि को पुनः अधीन करके अंग्रेजों को तंग कर दिया था। क्रांति में इन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ब्रिगेडियर शावर के नेतृत्व में रेवाड़ी पर हमला किया गया काफी लंबे संघर्ष के बाद परमवीर योद्धा को हार स्वीकार करनी ही पड़ी और अंत में इन्हें अफगानिस्तान भागना पड़ा।


आधुनिक हरियाणा एवं राष्ट्रीय आंदोलन से सम्बंधित प्रश्न


1. 1886 ई. के कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन (कोलकाता) में निम्न में से किसने हरियाणा के प्रतिनिधि के रूप में भाग नहीं लिया?

(a) पं. दीनदयाल शर्मा (c) श्री बालमुकुन्द गुप्त (b) राजा बहादुर मुरलीधर (d) हुकमचंद जैन

2. 1526 ई. में हरियाणा में किस स्थान पर बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच प्रसिद्ध युद्ध हुआ था?
(a) पानीपत (b) कुरुक्षेत्र (c) तावडू (d) जींद

3. निम्न में से किसने प्रथम विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश सेना में हरियाणा से सैनिक भर्ती का विरोध किया था?
(a) नेकीराम शर्मा (6) बिहारीलाल स्वामी श्रद्धानंद (d) लाला दुलीचंद

4. तरावड़ी का प्रथम युद्ध कब हुआ था?
(a) 1191 ई, (b) 1192 ई.(c) 1193 (d) 1194 ई.

5. असहयोग आंदोलन के समय हरियाणा के पानीपत में अक्टूबर, जिसका आयोजन किया

(a) लाला लाजपत राय (b) लाला मुरलीधर (c) शौकत अली (d) लाला दुलीचंद

6 तरावड़ी के प्रथम युद्ध में निम्न में से कौन पराजित हुआ?
(a) पृथ्वीराज प्रथम (b) पृथ्वीराज द्वितीय (c) पृथ्वीराज तृतीय (d) मोहम्मद गोरी

7. 1857 की क्रांति में हरियाणा के पटौदी से क्रांति का किसने नेतृत्व किया।
(a) अकबर अली (6) नाहर सिंह (c) नेकी राम (d) गफूर अली

8. 30 जुलाई, 1919 को गांधीजी को किस जिले में गिरफ्तार किया गया? (a) हिसार  (b) सोनीपत  (c)रोहतक (d) पानीपत

9.निम्न में से किसने दिल्ली सम्राट बहादुर शाह जफर से मित्रता की और अपने सैनिक भेजकर दिल्ली की गद्दी अंग्रेजों से मुक्त कराने में मदद की?

(a) नाहर सिंह (b) अब्दुर्रहमान खाँ (c)मोहन सिंह (d) राव किशन गोपाल

10. जब जनरल कवि कोर्टलैंड सेना सहित हिसार-सिरसा की तरफ गया, तो उसका रास्ते में मुकाबला किसने किया?

(a) नूर मुहम्मद खाँ (b) मंगल खाँ (c) तुलाराम (d) हुसैन खाँ

11. क्रांति के समय बहादुरगढ़ का नवाब कौन था?
(a) समंद खाँ (b) मुनीर बेग (c)बहादुर जंग खाँ (d) मोहन सिंह

12. 09 जनवरी, 1858 को अंग्रेज अधिकारी शावर्ज ने किस राजा को उसकी घुड्साल में कैद किया था?
(a) राज तुलाराम (b) किशन गोपाल (c) नाहरसिंह (d) मोहन सिंह

13. 23 अक्टूबर, 1857 को लालकिले के सामने किस देशभक्त को फाँसी पर लटका दिया

(a) अब्दुर्रहमान खाँ (b) मुनीर बेग (c)समंद खाँ (d) गुलाब खाँ

14. 1892 ई. के लाहौर अधिवेशन में हिसार का प्रतिनिधित्व किसने किया था?
(a) लाला लाजपत राय (b) पं. दीनदयाल शर्मा (c)नेकीराम शर्मा (d) लाला मुरलीधर

15. किस वर्ष तक हरियाणा के प्रत्येक जिले में कांग्रेस की स्थापना हो चुकी थी?
(a)वर्ष 1901 (b) वर्ष 1907 (c) वर्ष 1909 (d) वर्ष 1911

16. 6 अप्रैल, 1919 को रौलेट एक्ट के विरोध में किस जिले में एक बड़ी कॉन्फ्रेंस हुई?
(a) रोहतक (b) सोनीपत (c) अंबाला (d)पानीपत

17. रौलेट एक्ट का विरोध 3 जुलाई, 1919 को किस जिले में हुआ?
(a) हिसार (b) पानीपत (c) अंबाला (a) पानीपत

18. हरियाणा में 1857 की क्रांति में सम्मिलित प्रमुख व्यक्तियों में कौन शामिल नहीं था?
(a) अहमद अली (b) नाहरसिंह (c) रसाल सिंह (a) अकबर अली

19. कांग्रेस के दूसरे 1880 ई. के कोलकाता अधिवेशन में हरियाणा का प्रतिनिधित्व किसने किया

था?

(a) पं. दीनदयाल शर्मा (c) बालमुकुन्द गुप्त (b) लाला मुरलीधर (d) ये सभी

20. क्रांति का बिगुल हरियाणा में सर्वप्रथम कहाँ बजा?
(a) रेवाड़ी (b) झज्जर (C) अंबाला छावनी (d) हिसार

21. बल्लभगढ़ के अंतिम राजा का नाम बताइए, जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुआ था?

(a) नाहर सिंह (0) प्रताप सिंह (b) विजय सिंह (d) मेहर सिंह

22.24 मई, 1857 को दिल्ली से अंग्रेजी सेना की टुकड़ी विद्रोहियों को दबाने के लिए कहां आई?
(a) रोहतक (c) हिसार (b) सोनीपत (a) गुड़गाँव

23. किस जगह की क्रांति का नेतृत्व शहजादा मुहम्मद आजम ने किया?
(a) सिरसा (b) रोहतक (c) हिसार (d) सोनीपत

24. नारनौल के समीप नसीबपुर नामक गाँव में लड़े गए (स्वाधीनता-संग्राम) युद्ध में अंग्रेजों ने किन तीन शक्तियों को नष्ट किया था?
(a) रेवाड़ी, झज्जर और जोधपुर (b) गुड़गाँव, रेवाड़ी और जोधपुर (c) जींद, जगाधरी और पेहोवा (d) पानीपत, झज्जर और तावडू

25. हडसन ने रोहतक को किस राज्य के अधीन किया?

(a) भिवानी (b) सोनीपत (c) पटियाला (d) जींद

26. प्रथम स्वाधीनता-संग्राम में बल्लभगढ़ के किस राजा ने दिल्ली में क्रांतिकारी सेनाओं का नेतृत्व किया था?

(a) राजा कर्ण सिंह (b) राजा नाहर सिंह (c) राजा सूरजभान (d) राजा सत्यपाल

27. 1857 की क्रांति के समय पानीपत से इस क्रांति का नेतृत्व कौन कर रहा था? (a) इमाम अली कलंदर

(c) अमीनुद्दीन (b) साबर खाँ (c) अमीनुद्दीन (d) हसन अली

28. निम्नलिखित में से प्रदेश की किस रियासत ने 1857 की जन क्रांति में अंग्रेजों को महत्त्वपूर्ण सहयोग दिया था?
(a) बहादुरगढ़  (b) तावडू (C) झज्जर (d) जींद

29. राव तुलाराम का मुकाबला अंग्रेजों के साथ किस स्थान पर हुआ?

(a) रनिया (b) नारनौल (c) ढाणी (d) नसीरपुर

30. राव तुलाराम को अंत में कहाँ भागना पड़ा?

(a) चीन (6) अफगानिस्तान (0) बर्मा (d) बांग्लादेश

31. निम्न में से किसने गुड़गांव से 1857 की क्रांति के समय नेतृत्व नहीं किया?

(a) तुलाराम (b) नाहरसिंह (C) अकबर अली ( d) मोहन सिंह






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